अब तक पूरी तरह से रहस्यों से साये में रह रहे Covid-19 वायरस की एक कमजोरी भी है. उसे संक्रमित से स्वस्थ व्यक्ति में पहुंचने के लिए एक सरफेस की जरूरत होती है. वो हवा में या पानी में ट्रैवल नहीं कर सकता. इसे ही देखते हुए दुनियाभर के वैज्ञानिक इस बात पर सहमत हैं कि लोगों को घरों के भीतर रहना चाहिए और संक्रमित लोगों को स्वस्थ लोगों से एकदम अलग रखकर इलाज किया जाना चाहिए. न्यूयॉर्क टाइम्स के हवाले से हम व 15 तरीके दे रहे हैं, जो तुरंत लागू किए जाने चाहिए. एक्पर्ट्स का मानना है कि इन तरीकों को अपनाने से वायरस का संक्रमण काफी हद तक रोका जा सकता है.
वैज्ञानिकों को सुना जाना चाहिए
आजकल लगातार नेता ही इस मामले में प्रेस वार्ताएं कर रहे हैं. इसकी बजाए वैज्ञानिकों और एपिडेमियोलॉजिस्ट को लोगों को संबोधित करना चाहिए. वे आम लोगों को ज्यादा बेहतर ढंग से बता सकते हैं कि वायरस से बचने के लिए क्या करना चाहिए या कैसे कदम लेने चाहिए. प्रेस ब्रीफ राजनीति की बजाए इसपर फोकस हो कि जिंदगियां कैसे बचाई जाएं. National Security Council के Adm. Tim Ziemer जो कि इस महामारी की रिस्पॉन्स युनिट का नेतृत्व कर रहे हैं, उनका मानना है कि फिलहाल इमरजेंसी के हालात हैं, जिसमें गलतियां गिनाने की बजाए बीमारी से लड़ने के तरीके सुझाने की जरूरी है.
शहरों के बीच संक्रमण रोकने का तरीका
अगली प्राथमिकता ये है कि हमें फिलहाल एक्सट्रीम सोशल डिस्टेंसिंग रखनी होगी. अगर जादू की छड़ी से लोगों को 14 दिनों के लिए फ्रीज किया जा सकता तो वायरस का फैलाव रुक जाता. अब सोशल डिस्टेंसिंग और ग्लोबल लॉकडाउन की ऐसे तरीके हैं जो संक्रमण को जहां के तहां रोक सकते हैं.

हमें फिलहाल एक्सट्रीम सोशल डिस्टेंसिंग रखनी होगी
सही ढंग से जांच हो
जांच के लिए प्राथमिकता तय हो कि जो मरीज ज्यादा गंभीर हालत में हो, उसकी जांच पहले हो ताकि इलाज शुरू हो सके. इसी शुक्रवार, न्यू यॉर्क शहर में एलान हुआ कि केवल उन्हीं मरीजों को जांच होगी जो काफी खराब हालत में हैं और जिन्हें अस्पताल में रखे जाने की जरूरत है. अस्पतालों के भर जाने की वजह से ऐसा किया गया. लेकिन अब एक्सपर्ट इसे और बेहतर करने की बात कह रहे हैं.
कोरोना पॉजिटिव के लिए आइसोलेशन
जितनी जल्दी संभव हो, ऐसा किया जाना चाहिए कि मरीज पूरी तरह से आइसोलेट हो सकें. चीन में 75% से 80% तक संक्रमण परिवार से परिवार के बीच ही फैला. इस बारे में Centers for Disease Control and Prevention का साफ कहना है कि घर की बजाए आइसोलेशन सेंटर बनाए जाएं, जहां सिर्फ मरीज ही हों और हेल्थ वर्कर्स. वुहान में ऐसे सेंटर बनाए गए, जिन्हें “temporary hospitals” कहा गया. इसमें मरीजों के रहने की जगह और नर्सिंग होम के बीच सिर्फ एक लकीर का फासला था.
बुखार की तुरंत जांच
चूंकि चीन, ताइवान और वियतनाम पहले सार्स का कहर देख चुके हैं और साउथ कोरिया ने भी मर्स झेला है, वहां पर बुखार पर ध्यान देना आदत में आ चुका है. इन देशों में किसी बस, ट्रेन, ऑफिस, थिएटर या यहां तक कि किसी रेस्त्रां में जाने पर भी फीवर जांचा जाता है. क्लोरीन के पानी से हाथ धोने की तकनीक को बढ़ावा मिलना चाहिए.
संक्रमित के संपर्क में आए लोगों की जानकारी जुटाना
ये भी एक अहम कदम है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि ऐसे हरेक व्यक्ति की जांच होनी चाहिए जो किसी भी कोरोना पॉजिटिव मरीज के संपर्क में आया हो. चीन के वुहान में भी यही तरीका अपनाया गया था. फिलहाल जहां हेल्थ सुविधाएं इतनी कम हैं और दूसरी संक्रामक बीमारियों के लिए जांच की सुविधा नहीं, ऐसे में कोरोना के मामले में तुरंत एक्शन लिया जाना चाहिए.

जो मरीज ज्यादा गंभीर हालत में हो, उसकी जांच पहले हो ताकि इलाज शुरू हो सके
हर जगह मास्क हो
ऐसा डाटा कम है कि सर्जिकल मास्क से कोरोना को रोका जा सकता है लेकिन एशियाई देशों में ऐसा हो रहा है. ये मास्क की जरूरत से ज्यादा भीड़ के मनोविज्ञान के लिए है. हालांकि सभी विशेषज्ञों का मानना है कि बीमार को मास्क जरूर लगाना चाहिए. इससे होगा ये कि लोग खुद ही मास्क लगाए शख्स को देखकर उससे दूरी बना लेंगे. वैसे इसका दूसरा पक्ष भी है कि अगर मास्क सिर्फ बीमारी से जुड़ जाएगा तो बीमार भी उसे पहनने से हिचकेंगे. इसलिए मास्क सबके लिए हो और हर जगह उपलब्ध भी हो.
जरूरी सेवाएं रहें जारी
महामारी के दौरान भी कई सुविधाएं जारी रहनी चाहिए, जैसे खाना, पानी, बिजली, गैस, फोन लाइन और दवाएं की दुकानें. सेना और दूसरी चीजें भी बेहद जरूरी हैं ताकि डर फैलने पर नियंत्रण हो सके. ऐसे में सरकार ही इन जरूरी सर्विसेज को चालू रखा जाना पक्का कर सकती है.
वेंटिलेटर और ऑक्सीजन
अस्पतालों में मरीजों के लिए कम ही वेंटिलेटर है. ऐसे में अगर कोरोना के मरीज ज्यादा संख्या में आने लगें तो उन्हें संभालना मुश्किल हो जाएगा क्योंकि ये बीमारी श्वसन तंत्र पर ही अटैक करती है. फार्मा में काम कर रही कंपनियों को ज्यादा से ज्यादा वेंटिलेटर और ऑक्सीजन तैयार करने चाहिए.
अस्पतालों की व्यवस्था में बदलाव
चीन में सरकार ने दो ही हफ्तों में 2 नए अस्पताल तैयार करवाए. इनके अलावा बाकी सारे अस्पतालों को अलग-अलग काम मिले. जैसे कुछ का काम कोरोना के गंभीर रूप से संक्रमितों का इलाज था तो कुछ सिर्फ इमरजेंसी के लिए थे, जैसे हार्ट अटैक या बच्चे का जन्म जैसी चीजें. हमें भी अभी से इस दिशा में रणनीति बनानी चाहिए.

हरेक व्यक्ति की जांच होनी चाहिए जो किसी भी कोरोना पॉजिटिव मरीज के संपर्क में आया हो
स्कूलों के मामले में नए फैसले
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि एकदम से सारे स्कूल बंद नहीं हों, बल्कि सिर्फ प्रभावित इलाकों से स्कूल बंद होने चाहिए. इस बारे में CDC के पूर्व डायरेक्टर Dr. Thomas R. Frieden के अनुसार सारे स्कूल बंद करने का मतलब तभी है, जब बीमारी हर स्टेट में फैलती दिखे. अगर कोई स्टेट सुरक्षित है तो वहां स्कूल चालू रह सकते हैं.
वालंटियर की तैनाती
ये कदम भी इमरजेंसी के दौरान काफी काम आ सकता है. चीन ने बीमारी पर जीत पाई क्योंकि वहां पर काफी सारे वालंटियर थे जो लोगों और खासकर हेल्थ वर्कर्स की मदद कर रहे थे. वहां पर बाकायदा “Fight On, Wuhan! Fight On, China!” कैंपेन चल पड़ा था, जिसमें लोग एक-दूसरे की मदद कर रहे थे. फूड डिलीवरी, फीवर चेक करने या मरीज के बच्चों की देखभाल जैसे काम ये कर सकते हैं.
ट्रीटमेंट को प्राथमिकता
चीन, इटली और फ्रांस जैसे देशों में मरीजों पर लगभग सारी दवाएं इस्तेमाल की जा रही हैं. इससे दो संभावनाएं बनीं- एक तो मलेरिया ठीक करने वाली दवा या फिर बुखार ठीक करने वाली दवा- इनमें से कोई मरीजों के काम आ रही होगी. लेकिन ये दवाओं का असर है या कुछ और जरूरी है, ये अबतक पक्का नहीं हो सका है.
वैक्सीन की खोज
ये सबसे जरूरी चीज है जो दुनिया पर फैले डर को खत्म कर सकती है. कई कंपनियां इसपर काम कर रही हैं. अमेरिका के सिएटल में क्लिनिकल ट्रायल का पहला राउंड भी शुरू हो चुका है, जिसमें 45 लोग शामिल हैं. माना जा रहा है कि अगर सब ठीक रहा तो सालभर के भीतर कोरोना वायरस की वैक्सीन यानी टीका आ जाएगा.